माही क्लिनिक :-

भूमिका :

ट्रस्ट के मुख्य उद्देश्यों में स्वास्थ्य क्षेत्र भी है इस क्षेत्र में ट्रस्ट द्वारा स्वास्थ्य से सम्बंधित अस्पताल, डिस्पेंसरी व् रिसर्च सेण्टर आदि की स्थापना करना प्रस्तावित है |

ट्रस्ट ने ग्राम सरवन व् बेडदा के मध्य 3 प्राथमिक स्वास्थय केंद्र ग्राम बल्लिखेडा, सांकड़ व् बेडदा में माही क्लिनिक के नाम से संचालित करने की योजना बनायीं है जिसका उदेश्शीय मात्र मानव सेवा, ग्रामवासियों को समय की बचत के साथ उचित इलाज एवं अन्य अनियमितताओं से बचाना है |

माही क्लिनिक में निम्नलिखित प्रमुख सुविधाए उपलब्ध होंगी :-

  1. यह क्लिनिक शासकीय नियमो व् WHO मानको का पालन कर संचालित की जावेगी |
  2. क्लिनिक में प्रत्येक दिवस नियमित रूप से प्राथमिक उपचार दक्ष व् प्रशिक्षित चिकित्सीय दल के द्वारा विभिन्न जाचो (बी पी, शुगर, मलेरिया एवं प्रेगनेंसी ) के पश्च्यात संतोषजनक रूप से उचित दरो पर किया जावेगा |
  3. उपरोक्त ग्राम व् आस – पास के रोगियों को शहरी चिकित्सालयों में इलाज हेतु उचित दरो पर एम्बुलेंस की सुविधा प्रदान की जावेगी |
  4. प्रत्येक क्लिनिक पर स्वच्छ शौचालयों व् आर.ओ. जल की व्यवस्था रहेगी |

इसी क्रम में ट्रस्ट के कार्यकर्ताओ ने वर्ष 2018 में मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के सैलाना तहसील (भारत सरकार द्वारा घोषित अनुसूचित जनजाति क्षेत्र) के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रो का सर्वेक्षण किया जिसमें पाया गया कि यहाँ चिकित्सा सुविधा ना के बराबर है, इस क्षेत्र में बिखरी बस्तियाँ है जो कि आदिकाल से यथावत है यहाँ के निवासी दुर्गम परिस्थितियो में सुदूरवर्ती इलाको में विभिन्न मुलभूत सुविधाओ के अभाव में अपना जीवन यापन कर रहे है, यहाँ के निवासियों का प्रमुख रोजगार कृषि है जिसमे मात्र वर्षा ऋतु की एक ही फसल हो पाती है शेष रोजगार का साधन मजदूरी है जिसे कर ये लोग विकट परिस्थितयो में अपना जीवन यापन कर रहे है   |

सर्वेक्षण में निम्नलिखित तथ्य पाए गए :-

 

  1. मुख्य रूप से सर्वेक्षण ग्राम सरवन से बेडदा (दुरी लगभग 20 किलोमीटर) के मध्य किया गया |
  2. ग्राम सरवन व् बेडदा के मध्य 15 ग्राम पंचायते स्तथीत है जिनकी आबादी लगभग 38,000 – 40,000 के बीच में है | ये सभी ग्राम पंचायते जिला मुख्यालय से लगभग 50 से 55 किलोमीटर की दुरी पर स्तथीत है I
  3. इस क्षेत्र में कई किलोमीटर तक नियमित व् उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है |
  4. नियमित व् उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध ना होने के कारण इस क्षेत्र में अवैध व् झोलाछाप चिकित्सक फलफूल रहे है तथा अवैध दवाखानो का संचालन कर यहाँ की जनता से मनमानी रकम वसूल रहे है |
  5. मज़बूरी वश यहाँ के निवासी इन अवैध व् झोलाछाप चिकित्सकों से गलत उपचार करवा रहे है जिस कारण इन्हें स्वास्थ्य सम्बंधी विकट परिस्तिथियो का सामना करना पड़ रहा है तथा गलत उपचार होने से रोगियों की मृत्यु तक हो रही है |
  6. यहाँ के सुदूरवर्ती इलाको में रहने वाले निवासी जब बीमार होते है तो इन्हें शहरी चिकित्सालयों में इलाज करवाने के लिए जाना होता है रोगी को मुख्य सड़क तक पहुचाने हेतु रोगी के परिजन खाट या पलंग पर कई किलोमी टर तक कंधो पर उठाकर लाते है |
  7. शहरी चिकित्सालयों में इलाज हेतु जाने के लिए इन रोगियों या परिजनों के पास निजी वाहन ना होने की स्तथि में इन्हें सार्वजानिक वाहनों की सुविधा लेनी पड़ती है या अन्य निजी वाहन मूहँ माँगी दरो पर किराये से लेने पड़ते है जो की सही समय पर उपलब्ध नहीं हो पाते तथा सही समय पर उपचार ना मिलने की स्तथियो में रोगी की मृत्यु तक हो जाती है |
  8. यह क्षेत्र आर्थिक रूप से अत्यधिक पिछड़ा हुआ है तथा यहाँ के निवासी खेती – मजदूरी कर अपना जीवन यापन कर रहे है | विकट बुरी आर्थिक परिस्तिथियों में पूंजी जमा नहीं कर पाते तथा अचानक बीमार होने की स्तिथि में इन्हें मोटी ब्याज दर पर रकम उधार लेनी पड़ती है उस रकम का अधिकांश हिस्सा इलाज में न लग कर किराये – भाड़े में बर्बाद हो जाता है साथ ही परिजनों को अपना रोजगार छोड़ कर रोगी के साथ इलाज हेतु दूर जाना पड़ता है जिस कारण इन्हें आर्थिक, शारीरिक एवं मानसिक हानि होती है |

WhatsApp chat